सियासी हलचल: IAS को दरकिनार कर IPS पर भरोसा दिखा रहे शिवराज

भोपाल. मध्यप्रदेश में मौसमी तूफान तो नहीं आया लेकिन सियासी तूफान ने दस्तक दे दी है। इसके संकेत इस  बात से मिल रहे हैं कि सीएम शिवराज सिंह चौहान की छवि चमकाने वाला जनसंपर्क विभाग को अब उन्हें अपने रिश्तेदार के माध्यम से कमांड करना पड़ रहा है। आखिर ये नौबत आई क्यों और कैसे आई? क्या है इसके पीछे का गणित? इस बारे में CVN24.Com की टीम ने खोजबीन की। तब सामने आया कि इस चुनाव में सीएम को कांग्रेस से नहीं, बल्कि खुद की पार्टी से लड़ना है…

-सोमवार को आनन-फानन में जनसंपर्क विभाग के संचालक का काम देख रहे माथुर को हटा दिया गया और उनकी जगह आईपीएस आशुतोष प्रताप सिंह को संचालक बना दिया गया।

-IPS एपी सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज की भांजी रितु चौहान के पति हैं। ऐसे में उनसे ज्यादा विश्वसनीय व्यक्ति उन्हें नजर नहीं आया।

-सीएम की छवि चमकाने के लिए चुनावी साल में जनसंपर्क का बड़ा बजट रहता है लेकिन उल्टे सीएम की छवि ही इस डिपार्टमेंट से बिगड़ रही थी। इसलिए सीधे किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो डिपार्टमेंट से गुजरने वाले हर कागज और गड़बड़ी को सीएम तक पहुंचा सके।

-सूत्रों के अनुसार, सीएम के खास दिलीप सूर्यवंशी की बहन उपमा राय को मध्यप्रदेश रेडक्रास सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव में हराने के लिए केंद्र से निर्देश प्राप्त हुए थे। इन निर्देशों को मानते हुए बीजेपी के एक कद्दावर नेता ने उपमा राय को हराने के लिए जान लगा दी और उसे हराकर माने। ऐसे में अब सीएम के सामने कांग्रेस से ज्यादा खतरनाक खुद की पार्टी के लोग हो गए हैं।

-वहीं, दूसरी और कमलनाथ का टीम मैनेजमेंट शबाब पर है। सरकार के हर फैसले की खबर कमलनाथ की टीम को हो रही है। सरकार बदलने के संकेतों को समझ आईएएस लॉबी भी अब कांग्रेस के पाले में झुकती जा रही है। ऐसे में शिवराज अब आईएएस पर भरोसा न कर आईपीएस पर भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों से वह पुलिस विभाग के अफसरों को मजबूत करने में लगे हैं।

-सत्ता के बदलते समीकरणों से शिवराज की भी नींद उड़ी हुई है। ऐसे में वे हर वह दांव आजमा रहे हैं जो उनकी सत्ता को बरकरार रख सके।

 

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